कालसर्प दोष तब माना जाता है जब जन्मकुंडली के सभी सातों ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं। इसका निवारण पूजन उज्जैन में कराया जाता है, और नाग पंचमी इसके लिए वर्ष का सबसे उपयुक्त दिन मानी जाती है।
ज्योतिष में कालसर्प दोष उस स्थिति को कहा जाता है जिसमें कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु की धुरी के एक ओर आ जाते हैं। मान्यता है कि इससे जीवन में रुकावटें, विलंब और अस्थिरता का अनुभव होता है। उज्जैन इस दोष के निवारण पूजन के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
यह पृष्ठ पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं की जानकारी देता है। दोष है या नहीं, यह कुंडली देखकर ही तय होता है — किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
जन्मकुंडली में राहु और केतु सदैव एक-दूसरे से 180 अंश की दूरी पर रहते हैं। यदि शेष सातों ग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि — इन दोनों के बीच के भाग में आ जाएँ, तो इसे कालसर्प दोष कहा जाता है।
यह कोई रोग या दंड नहीं, बल्कि कुंडली की एक विशेष ग्रह-स्थिति है। कई सफल व्यक्तियों की कुंडली में भी यह योग पाया जाता है।
परंपरा में इस स्थिति से जोड़े जाने वाले अनुभव ये बताए जाते हैं:
राहु की भाव-स्थिति के अनुसार बारह प्रमुख प्रकार बताए गए हैं — अनंत, कुलिक, वासुकी, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर और शेषनाग। प्रत्येक का प्रभाव-क्षेत्र भिन्न बताया जाता है, इसलिए पूजन का संकल्प भी कुंडली के अनुसार लिया जाता है।
कालसर्प दोष निवारण पूजन में संकल्प, गणेश पूजन, नवग्रह शांति, राहु-केतु का विशेष पूजन तथा नाग-नागिन के रजत या स्वर्ण प्रतीकों का अभिषेक सम्मिलित रहता है। अंत में हवन और दान किया जाता है।
उज्जैन में यह पूजन विशेष रूप से कराया जाता है क्योंकि महाकालेश्वर काल के अधिपति माने जाते हैं और नागचंद्रेश्वर मंदिर भी इसी परिसर में स्थित है।
नाग पंचमी को इस पूजन के लिए वर्ष का सर्वोत्तम दिन माना जाता है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक माह की पंचमी तिथि और सोमवार भी उपयुक्त माने जाते हैं।
नाग पंचमी पर उज्जैन में भीड़ बहुत अधिक रहती है, इसलिए इस तिथि के लिए बुकिंग पहले से करा लेना व्यावहारिक रहता है।
पूजन आपके नाम, गोत्र और संकल्प के साथ पुजारी द्वारा सम्पन्न कराया जा सकता है। आपको केवल अपना विवरण और तिथि चुननी होती है।
हमारे माध्यम से बुकिंग निःशुल्क है — कोई बुकिंग शुल्क नहीं, कोई सेवा शुल्क नहीं। दक्षिणा सीधे पुजारी को दी जाती है।
जन्मकुंडली देखकर। यदि सभी सात ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाएँ तो यह स्थिति बनती है। किसी योग्य ज्योतिषी से कुंडली दिखाकर पुष्टि करें।
उज्जैन, त्र्यंबकेश्वर और प्रयागराज इसके लिए प्रमुख स्थान हैं। उज्जैन में यह पूजन महाकालेश्वर की नगरी होने के कारण विशेष माना जाता है।
सामान्यतः लगभग 2 से 3 घंटे। विधि और संकल्प के अनुसार समय कम या अधिक हो सकता है।
हाँ। पूजन आपके नाम, गोत्र और संकल्प के साथ पुजारी द्वारा कराया जाता है और ईमेल पर पुष्टि भेजी जाती है।
नाग पंचमी को वर्ष का सबसे उपयुक्त दिन माना जाता है। इसके अतिरिक्त पंचमी तिथि और सोमवार भी उपयुक्त माने जाते हैं।
परंपरा में यह पूजन शांति और मानसिक बल के लिए कराया जाता है। कोई भी अनुष्ठान किसी परिणाम की गारंटी नहीं देता; इसे श्रद्धा और आस्था के भाव से कराया जाता है।