कार्तिक पूर्णिमा 2026 — उज्जैन में स्नान और पूजा

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था। उज्जैन में इस दिन क्षिप्रा स्नान का विशेष महत्व है और महाकालेश्वर मंदिर में अभिषेक कराने वाले भक्तों की संख्या बढ़ जाती है।

कार्तिक पूर्णिमा 2026

तिथि का समय नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार है और स्थान के अनुसार भिन्न हो सकता है। कृपया स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

शिव उपासना और त्रिपुरी पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा का सीधा संबंध भगवान शिव से है। मान्यता है कि इसी दिन उन्होंने त्रिपुरासुर का संहार कर देवताओं को भय से मुक्त किया, और इसी कारण इसे त्रिपुरी पूर्णिमा कहा जाता है।

इसी दिन को देव दीपावली भी कहते हैं, जब घाटों और मंदिरों में दीप जलाए जाते हैं।

उज्जैन में क्षिप्रा स्नान

कार्तिक मास में क्षिप्रा नदी में स्नान का विशेष महत्व माना जाता है, और कार्तिक पूर्णिमा इस मास का अंतिम एवं सबसे पुण्यदायी दिन होता है।

स्नान के पश्चात भक्त महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन एवं अभिषेक कराते हैं तथा दीपदान करते हैं।

इस दिन कौन सी पूजा कराई जाती है

इस तिथि पर सामान्यतः निम्न अनुष्ठान कराए जाते हैं:

बुकिंग कब करें

कार्तिक पूर्णिमा पर उज्जैन में भीड़ अधिक रहती है। कम से कम दो सप्ताह पूर्व बुकिंग करने की सलाह दी जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कार्तिक पूर्णिमा 2026 कब है?

मंगलवार, 24 नवंबर 2026। पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर रात्रि 11:42 से 24 नवंबर रात्रि 08:23 तक रहेगी।

इसे त्रिपुरी पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था, इसीलिए इसे त्रिपुरी या त्रिपुरारी पूर्णिमा कहा जाता है।

उज्जैन में इस दिन क्या किया जाता है?

क्षिप्रा नदी में स्नान, महाकालेश्वर दर्शन, अभिषेक और दीपदान।

क्या दूर से पूजा कराई जा सकती है?

हाँ। पुजारी आपके नाम और गोत्र से संकल्प लेकर अनुष्ठान सम्पन्न करते हैं।