कुंभ विवाह — मांगलिक दोष का उपाय, विधि और उज्जैन में बुकिंग

कुंभ विवाह वह प्रतीकात्मक विवाह है जो मांगलिक व्यक्ति का वास्तविक विवाह से पहले कराया जाता है — घड़े (कुंभ), पीपल अथवा केले के वृक्ष के साथ। मान्यता है कि इससे मंगल दोष का प्रभाव इस प्रतीकात्मक विवाह पर चला जाता है।

जन्मकुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में मंगल होने पर व्यक्ति को मांगलिक कहा जाता है। परंपरा में इसका एक उपाय कुंभ विवाह है। अर्क विवाह इसी का दूसरा रूप है, जिसमें अर्क (मदार) के पौधे के साथ विवाह कराया जाता है।

एक नज़र में

यह पृष्ठ पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं की जानकारी देता है। कुंडली में दोष है या नहीं और कुंभ विवाह उचित है या अर्क विवाह — यह पुजारी कुंडली देखकर बताते हैं।

कुंभ विवाह की विधि

अनुष्ठान में मांगलिक व्यक्ति का विवाह प्रतीक रूप में कराया जाता है — कुंभ (घड़े) के साथ, पीपल के वृक्ष के साथ, अथवा केले के वृक्ष के साथ। विधि सामान्य विवाह संस्कार के अनुरूप संकल्प, पूजन और फेरों के साथ पूर्ण होती है।

अनुष्ठान की अवधि सामान्यतः दो घंटे तक रहती है।

कुंभ विवाह और अर्क विवाह में अंतर

कुंभ विवाह में घड़े या वृक्ष के साथ विवाह कराया जाता है। अर्क विवाह में अर्क अर्थात मदार के पौधे के साथ। दोनों का उद्देश्य समान माना जाता है।

कुंडली की स्थिति के अनुसार पुजारी बताते हैं कि कौन सा रूप उपयुक्त रहेगा। कई परिवार दोनों में से एक ही कराते हैं।

उज्जैन में यह अनुष्ठान क्यों

मंगल दोष से जुड़े अनुष्ठानों के लिए उज्जैन परंपरा में प्रमुख स्थान माना जाता है, और मंगल से संबंधित पूजाओं के लिए यहाँ मंगलवार विशेष माना जाता है।

यहाँ कुंभ विवाह, अर्क विवाह और मंगल दोष पूजन तीनों कराए जाते हैं।

विवाह से पहले तिथि कब तय करें

यह अनुष्ठान वास्तविक विवाह से पहले कराया जाता है, इसलिए विवाह की तिथि तय होते ही इसकी तिथि भी सुरक्षित कर लेना उचित रहता है।

बुकिंग के समय कुंडली की जानकारी दे देने से पुजारी पहले से तैयारी कर लेते हैं। पूजा वीडियो कॉल पर भी देखी जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुंभ विवाह क्या है?

मांगलिक व्यक्ति का वास्तविक विवाह से पहले घड़े, पीपल अथवा केले के वृक्ष के साथ कराया जाने वाला प्रतीकात्मक विवाह।

कुंभ विवाह क्यों कराया जाता है?

मान्यता है कि मंगल दोष का प्रभाव इस प्रतीकात्मक विवाह पर चला जाता है, जिससे वास्तविक विवाह पर उसका असर नहीं रहता।

कुंभ विवाह और अर्क विवाह में क्या अंतर है?

कुंभ विवाह घड़े या वृक्ष के साथ होता है, अर्क विवाह अर्क (मदार) के पौधे के साथ। उद्देश्य समान माना जाता है।

कुंभ विवाह में कितना समय लगता है?

सामान्यतः दो घंटे तक।

कुंभ विवाह कब कराना चाहिए?

वास्तविक विवाह से पहले। मंगलवार को इसके लिए विशेष उपयुक्त माना जाता है।

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विवाह की तिथि तय होते ही यह अनुष्ठान पहले से सुरक्षित कर लें।

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