मंगल दोष (मांगलिक) — लक्षण, प्रभाव और उज्जैन में निवारण पूजा

मंगल दोष तब माना जाता है जब जन्मकुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में मंगल स्थित हो। ऐसी कुंडली वाले व्यक्ति को मांगलिक कहा जाता है, और इसका निवारण पूजन उज्जैन में कराया जाता है।

मंगल दोष, जिसे मांगलिक दोष या कुज दोष भी कहा जाता है, विवाह से जुड़ी सबसे अधिक चर्चित ज्योतिषीय स्थिति है। मान्यता है कि इससे विवाह में विलंब और दांपत्य जीवन में मतभेद की स्थिति बनती है। उज्जैन में इसके निवारण के लिए मंगल दोष पूजन, कुंभ विवाह और अर्क विवाह कराए जाते हैं।

एक नज़र में

यह पृष्ठ पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं की जानकारी देता है। दोष की स्थिति और उसकी तीव्रता कुंडली देखकर ही तय होती है — किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।

मंगल दोष क्या है

जब जन्मकुंडली के लग्न (पहले), चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल विराजमान हो, तो उसे मंगल दोष कहा जाता है। ऐसे जातक को मांगलिक कहा जाता है।

मंगल को ऊर्जा, साहस और आवेग का कारक माना गया है। परंपरा में यह मान्यता है कि विवाह से जुड़े भावों में इसकी उपस्थिति संबंधों में तीव्रता ले आती है।

सामान्यतः बताए जाने वाले लक्षण

परंपरा में इस स्थिति से जोड़े जाने वाले अनुभव ये बताए जाते हैं:

क्या मांगलिक दोष हमेशा प्रभावी होता है

नहीं। शास्त्रों में अनेक स्थितियाँ बताई गई हैं जिनमें यह दोष स्वतः शांत माना जाता है — जैसे मंगल का स्वराशि या उच्च राशि में होना, गुरु अथवा चंद्र की दृष्टि, अथवा वर-वधू दोनों की कुंडली में यह योग होना।

इसीलिए किसी योग्य ज्योतिषी से कुंडली दिखाना आवश्यक है। केवल मंगल की स्थिति देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं।

उज्जैन में निवारण के उपाय

मंगल दोष पूजन में संकल्प, गणेश पूजन, नवग्रह शांति और मंगल ग्रह का विशेष पूजन तथा हवन सम्मिलित रहता है। मंगलवार को यह पूजन विशेष रूप से कराया जाता है।

मंगलनाथ मंदिर — मंगल दोष पूजा कहाँ होती है

उज्जैन में मंगल दोष की पूजा मंगलनाथ मंदिर में कराई जाती है। क्षिप्रा नदी के किनारे टेकरी पर स्थित यह मंदिर भगवान मंगल को समर्पित एकमात्र मंदिर माना जाता है।

मत्स्य पुराण के अनुसार मंगल ग्रह की उत्पत्ति इसी स्थान पर हुई — भगवान शिव के स्वेद की एक बूँद से। इसी कारण मंगल दोष निवारण के लिए यह स्थान सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।

भात पूजा क्या है

मंगलनाथ में मंगल दोष के लिए जो अनुष्ठान होता है उसे भात पूजा कहा जाता है। इसमें पके चावल (भात), दही और कुमकुम शिवलिंग पर अर्पित किए जाते हैं।

मान्यता है कि इससे मंगल की उग्र ऊर्जा शांत होती है और विवाह में आने वाली बाधा दूर होती है। इसे मंगल भात पूजा और अंगारक दोष शांति भी कहा जाता है।

मंगलवार और अंगारकी चतुर्थी

मंगल का दिन मंगलवार है, इसलिए भात पूजा के लिए मंगलवार सर्वोत्तम माना जाता है। इस दिन मंदिर में भीड़ अधिक रहती है।

अंगारकी चतुर्थी पर भीड़ सामान्य मंगलवार से भी कहीं अधिक होती है। इन तिथियों पर पूजा करानी हो तो कम से कम एक सप्ताह पहले तिथि सुरक्षित कर लेना उचित रहता है।

पूजा का खर्च किस पर निर्भर करता है

खर्च अनुष्ठान के प्रकार पर निर्भर करता है — साधारण भात पूजा, विस्तृत पूजा, अथवा कुंभ विवाह या अर्क विवाह जैसे अतिरिक्त कर्म। पुजारियों की संख्या और सामग्री से भी अंतर आता है।

हमारे माध्यम से बुकिंग पूर्णतः निःशुल्क है — कोई सेवा शुल्क नहीं। दक्षिणा और सामग्री का व्यय सीधे पुजारी को दिया जाता है, और तिथि तय होने पर पुजारी आपको स्पष्ट रूप से बता देते हैं कि किस अनुष्ठान में क्या लगेगा।

यदि आप उज्जैन नहीं आ सकते

पूजन आपके नाम, गोत्र और संकल्प के साथ पुजारी द्वारा सम्पन्न कराया जा सकता है। आपको केवल विवरण और तिथि चुननी होती है।

बुकिंग निःशुल्क है — दक्षिणा सीधे पुजारी को दी जाती है।

आप वीडियो कॉल पर जुड़कर पूरी पूजा लाइव देख सकते हैं, और पूजा के बाद संपूर्ण अनुष्ठान की वीडियो रिकॉर्डिंग भी आपको भेजी जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगल दोष की पूजा उज्जैन में कहाँ होती है?

मंगलनाथ मंदिर में। क्षिप्रा तट पर टेकरी पर स्थित यह मंदिर भगवान मंगल को समर्पित एकमात्र मंदिर माना जाता है, और मत्स्य पुराण के अनुसार मंगल का जन्मस्थान है।

भात पूजा क्या होती है?

मंगलनाथ में मंगल दोष के लिए किया जाने वाला अनुष्ठान, जिसमें पके चावल (भात), दही और कुमकुम शिवलिंग पर अर्पित किए जाते हैं। इसे मंगल भात पूजा भी कहा जाता है।

मंगल दोष पूजा का खर्च कितना होता है?

यह अनुष्ठान के प्रकार, पुजारियों की संख्या और सामग्री पर निर्भर करता है। हमारे माध्यम से बुकिंग निःशुल्क है; दक्षिणा सीधे पुजारी को दी जाती है और तिथि तय होने पर वे स्पष्ट बता देते हैं।

मांगलिक दोष क्या होता है?

जब जन्मकुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में मंगल हो, तो उसे मंगल दोष कहते हैं और जातक को मांगलिक कहा जाता है।

मंगल दोष कैसे पता करें?

जन्मकुंडली में मंगल की भाव-स्थिति देखकर। तीव्रता कई अन्य योगों पर भी निर्भर करती है, इसलिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श करें।

मंगल दोष का निवारण कैसे होता है?

मंगल दोष पूजन मुख्य उपाय है। परंपरा में कुंभ विवाह और अर्क विवाह भी कराए जाते हैं। उज्जैन इन अनुष्ठानों के लिए जाना जाता है।

क्या मांगलिक का विवाह गैर-मांगलिक से हो सकता है?

परंपरा में इससे पहले निवारण पूजन कराने की सलाह दी जाती है। अनेक स्थितियों में दोष स्वतः शांत भी माना जाता है — कुंडली मिलान से ही निर्णय लेना उचित है।

मंगल दोष पूजा के लिए कौन सा दिन उपयुक्त है?

मंगलवार को यह पूजन सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।

क्या पूजा से दोष पूरी तरह समाप्त हो जाता है?

यह पूजन शांति और शुभ भाव के लिए कराया जाता है। कोई भी अनुष्ठान किसी परिणाम की गारंटी नहीं देता।

इस दोष के लिए कराई जाने वाली पूजाएं

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