नागचंद्रेश्वर मंदिर 17 अगस्त 2026, सोमवार को मध्यरात्रि से 24 घंटे के लिए खुलेगा। अगला अवसर 6 अगस्त 2027, शुक्रवार (नाग पंचमी) को होगा।
नागचंद्रेश्वर मंदिर महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है और वर्ष में केवल एक दिन — नाग पंचमी को — दर्शन हेतु खोला जाता है। शेष 364 दिन इसके द्वार बंद रहते हैं। 2026 में यह मंदिर 17 अगस्त को खुलेगा।
समय मंदिर प्रशासन द्वारा प्रतिवर्ष घोषित किया जाता है और इसमें परिवर्तन संभव है। यात्रा से पूर्व आधिकारिक घोषणा अवश्य देखें।
मान्यता है कि सर्पराज तक्षक ने यहाँ भगवान शिव की तपस्या की थी और उन्हें यहाँ निवास का वरदान प्राप्त हुआ। उनकी एकांत साधना में विघ्न न हो, इसलिए मंदिर वर्ष में केवल एक दिन खोला जाता है।
यहाँ की प्रतिमा दुर्लभ मानी जाती है, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती सर्प शय्या पर विराजमान हैं। ऐसी प्रतिमा अन्यत्र कहीं नहीं मिलती।
नाग पंचमी पर लाखों भक्त दर्शन हेतु पहुँचते हैं और कतार कई किलोमीटर लंबी हो सकती है। दर्शन में कई घंटे लग सकते हैं।
2026 में इसी दिन सावन की तीसरी सवारी भी निकलेगी, जिससे नगर में भीड़ और अधिक रहेगी। यदि आप यात्रा की योजना बना रहे हैं तो ठहरने की व्यवस्था पहले से कर लें।
दर्शन के लिए उपस्थित होना आवश्यक है, परंतु कालसर्प दोष पूजन, रुद्राभिषेक जैसी पूजाएँ आपके नाम और गोत्र से पुजारी द्वारा सम्पन्न कराई जा सकती हैं।
नाग पंचमी कालसर्प दोष निवारण के लिए वर्ष का सबसे उपयुक्त दिन माना जाता है, इसलिए इस तिथि के लिए बुकिंग पहले से करें।
सोमवार, 17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी पर, मध्यरात्रि त्रिकाल पूजा के बाद 24 घंटे के लिए।
शुक्रवार, 6 अगस्त 2027 को नाग पंचमी पर। तिथि पंचांग के अनुसार है; मंदिर प्रशासन की आधिकारिक घोषणा से पुष्टि कर लें।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर।
नहीं। मंदिर के द्वार केवल नाग पंचमी को खोले जाते हैं।
हाँ। कालसर्प दोष पूजन और अन्य अनुष्ठान आपके नाम से पुजारी द्वारा कराए जा सकते हैं।