नारायण बलि वह अनुष्ठान है जो परिवार में हुई अकाल मृत्यु — दुर्घटना, आत्महत्या, जल में डूबना, सर्पदंश — के बाद उस आत्मा की शांति के लिए कराया जाता है। उज्जैन में यह क्षिप्रा तट पर कराया जाता है और इसकी अवधि सामान्यतः तीन घंटे तक होती है।
परंपरा में माना जाता है कि अकाल मृत्यु में आत्मा को गति नहीं मिलती और उसका प्रभाव परिवार पर बना रहता है। नारायण बलि उसी के निवारण का कर्म है, और इसे प्रायः पितृ दोष के उपायों के साथ कराया जाता है।
यह पृष्ठ पारंपरिक मान्यताओं की जानकारी देता है। आपकी स्थिति में यह कर्म उचित है या कोई अन्य, यह पुजारी परिवार की परिस्थिति और कुंडली देखकर बताते हैं।
परंपरा में इसे दुर्घटना, आत्महत्या, जल में डूबने, सर्पदंश या अन्य अप्राकृतिक कारण से हुई मृत्यु के बाद कराया जाने वाला कर्म माना जाता है।
यह उन परिवारों में भी कराया जाता है जहाँ किसी सदस्य का अंतिम संस्कार विधिवत न हो सका हो, अथवा मृत्यु के बाद के कर्म अधूरे रह गए हों।
अकाल मृत्यु को परंपरा में पितृ दोष का एक कारण माना जाता है। इसलिए नारायण बलि प्रायः पितृ दोष पूजन या त्रिपिंडी श्राद्ध के साथ कराई जाती है।
कौन सा कर्म पहले और कौन सा साथ में — यह पुजारी कुंडली और परिवार की स्थिति देखकर तय करते हैं।
यह अनुष्ठान अन्य पूजाओं की तुलना में लंबा होता है और सामान्यतः तीन घंटे तक चलता है। इसलिए तिथि पहले से तय करना आवश्यक रहता है।
बुकिंग के समय दिवंगत व्यक्ति का नाम, गोत्र और मृत्यु का लगभग समय बता देने से पुजारी संकल्प की तैयारी पहले कर लेते हैं।
उज्जैन न आ सकने पर पूजा आपके नाम, गोत्र और दिवंगत सदस्य के नाम से संकल्प लेकर की जाती है।
आप वीडियो कॉल पर जुड़कर पूरा अनुष्ठान लाइव देख सकते हैं, और पूजा के बाद संपूर्ण वीडियो रिकॉर्डिंग भेजी जाती है।
परिवार में हुई अकाल या अप्राकृतिक मृत्यु के बाद उस आत्मा की शांति और परिवार पर उसके प्रभाव के निवारण हेतु कराया जाने वाला अनुष्ठान।
जिन परिवारों में दुर्घटना, आत्महत्या, डूबने या सर्पदंश जैसे कारणों से मृत्यु हुई हो, अथवा मृत्यु के बाद के कर्म अधूरे रह गए हों।
सामान्यतः तीन घंटे तक। यह अन्य पूजाओं से लंबा अनुष्ठान है, इसलिए तिथि पहले से तय करनी चाहिए।
पितृ पक्ष और अमावस्या को सर्वोत्तम माना जाता है।
हाँ। संकल्प आपके नाम, गोत्र और दिवंगत सदस्य के नाम से लिया जाता है, और आप वीडियो कॉल पर देख सकते हैं।
तीन घंटे का अनुष्ठान है — तिथि पहले से सुरक्षित करना आवश्यक है।