सिद्धवट क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित प्राचीन वट वृक्ष है, जो भारत के चार अक्षय वटों में गिना जाता है। उज्जैन में पिंडदान, तर्पण और पितृ दोष शांति मुख्यतः यहीं कराए जाते हैं। पितृ पक्ष में यहाँ सबसे अधिक भीड़ रहती है।
मान्यता है कि यह वट वृक्ष माता पार्वती द्वारा लगाया गया था। प्रयागराज का अक्षय वट, गया का वट, वृंदावन का वंशीवट और नासिक का पंचवट — इन्हीं की श्रेणी में उज्जैन का सिद्धवट आता है।
यह पृष्ठ स्थान और परंपरा की जानकारी देता है। आपकी स्थिति में कौन सा कर्म उचित है, यह पुजारी कुंडली और पारिवारिक परिस्थिति देखकर बताते हैं।
अक्षय का अर्थ है जिसका क्षय न हो। परंपरा में कहा जाता है कि इस वृक्ष को काटकर उस पर लोहे की चादरें जड़ दी गई थीं, फिर भी वह पुनः पल्लवित हो गया। इसी से इसे अक्षय वट कहा गया।
भारत में ऐसे चार वट माने जाते हैं — प्रयागराज, गया, वृंदावन और उज्जैन। पितृ कर्म के लिए इन चारों का समान महत्व बताया जाता है।
सबसे अधिक पिंडदान और तर्पण कराए जाते हैं। इनके साथ पितृ दोष शांति, त्रिपिंडी श्राद्ध और नारायण बलि भी यहीं कराई जाती है।
कालसर्प दोष निवारण के लिए भी सिद्धवट जाना जाता है। वट की जड़ों पर दूध अर्पित करने की परंपरा वंश की समृद्धि के लिए मानी जाती है।
पितृ पक्ष 2026 में 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक यहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते हैं। सर्व पितृ अमावस्या — 10 अक्टूबर — पर भीड़ सबसे अधिक होती है।
इन दिनों में पुजारियों का समय पहले से भर जाता है, इसलिए तिथि पहले से सुरक्षित कर लेना आवश्यक है।
उज्जैन न आ सकने पर पिंडदान और श्राद्ध आपके नाम, गोत्र और पितरों के नाम से संकल्प लेकर कराए जाते हैं।
आप वीडियो कॉल पर जुड़कर पूरा कर्म लाइव देख सकते हैं, और संपूर्ण अनुष्ठान की वीडियो रिकॉर्डिंग भी भेजी जाती है।
उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर। यह एक प्राचीन वट वृक्ष और घाट है, जो पिंडदान तथा पितृ कर्म के लिए प्रसिद्ध है।
अक्षय अर्थात जिसका क्षय न हो। परंपरा के अनुसार इसे काटकर लोहे की चादरें जड़ने पर भी यह पुनः पल्लवित हो गया।
पिंडदान, तर्पण, पितृ दोष शांति, त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण बलि और कालसर्प दोष निवारण।
प्रयागराज, गया, वृंदावन का वंशीवट और उज्जैन का सिद्धवट।
हाँ। संकल्प आपके नाम, गोत्र और पितरों के नाम से लिया जाता है, और आप वीडियो कॉल पर देख सकते हैं।
पितृ पक्ष में तिथियाँ जल्दी भरती हैं। अभी सुरक्षित करें।